गूँज

भारत माता की जय जय कार
सुन रहा सारा संसार
आज़ादी सिर्फ एक दिन की गुलाम नहीं
हर दिन जशन हो, रमे इसमें हम सभी

कहीं है ऊंचे पर्वत , कही है श्रृंख्लाए
कहीं है लम्बी नदियाँ, कहीं है गहरी गुफाएं

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आईना


​आईना दिखाए सच्चाई

इंसान की रग रग से वाकिफ कराऐ

एक स्त्री आईने में खुद को निहारे

देख देख आईना फिर मुस्काये

आया गुस्सा उसको बड़ा

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अस्तित्व

भूल बैठा खुद को , मैं था एक मुसाफिर यहाँ

जीवन की आपा- धापी मे , गुम होते गए निशान

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गोलमाल दुनिया

ज़िन्दगी की अजब फिलोस्फी

अल्लाह ने घुमाई  कैसी ये चकरी ,

जो सोचा, वो न पाया,जो न सोचा ,वो खुदबखुद चला आया

गोल गोल भूमंडल में, कितने जगमगाते है तारे

भरा पढ़ा  अथा ज्ञान भ्रमाण्ड मे,ज़रा खोजो तो प्यारे

उपनिषद,भागवत,गीता,पुराण  लाखो लोगो ने रट डाले

फिर भी अर्थ का अनर्थ समझकर,घर तबाह  कर डाले

किस्मत का रोना रोकर, भर भर सागर भर डाले

छोटी चादर में पैर पसारे ,और कितने  ही ख्वाब बुन डाले

अजब लीला है मानव तेरी, कौन सुलझाए ये पहेली

कहने वाले कहते है, खुदा की  रचना है अलबेली

कही हैं सूखा, कही बाढ़ ने आफत में जान ले ली

जो कहता है स्वयं   को धनवान बड़ा ,

उसकी  चोखट पे भिखारी  भूखा है खड़ा,

देख इंसान आज  है बेबस बड़ा