Reblog

Hey lovelies!

I read many blogs today and all are amazing ,but this poem leave me speechless .I want to share it with my fellow bloggers.

MUST visit  Vaibhav Verwa blogs.He writes amazing poems.

आवाज निर्भीक कब होगी?  –

​शोर शराबा बहुत है हटाओ
सच की तस्दीक कब होगी ?
निजाम तो आएंगे जाएंगे,
यह आवाज निर्भीक कब होगी?

कहीं प्रदर्शनी, कहीं परदा! काने हो गए हो क्या?
सच बतलाओ तुम्हारी आँख ठीक कब होगी?

इतना अंधेरा, रौशनदानों पर भी चट्टान रख दिए हैं?
वस्तुविद् बोल! यह नक्काशी बारीक कब होगी ?

भीड़ भड़की ,सड़क पर गिरी है लाश सभ्यता की
जनतंत्र जननी! इंसानियत की तहरीक कब होगी ?

तेरी मिट्टी तनिक लाल तो थी,खून से नहीं खेलती थी
बहुत दूर हो गई है बापू,न जाने नज़दीक कब होगी?

पुनश्च: आपातकाल की घोषणा के 42 वर्ष हो गए, पत्रकारिता में जो ज़हर तब घोला गया था वह आज भी रह रहकर सामने आता है, खासकर समाचार चैनलों की स्थिति बड़ी दयनीय है। खबर और सनसनी के नाम पर जब सोशल मीडिया के चुटकुले मुख्यधारा के तकिया कलाम बन जाएँ तो एक सजग राष्ट्र को जागरूक होना ही होगा ।

http://wp.me/p8uuNe-1f

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